27.6.12

वर्षा से पहले.....


धान के इन बीजों को बारिश की प्रतीक्षा है।



कमल के इन फूलों को बारिश का भय है।



इन्हें न भय है न प्रतीक्षा। 



स्थानः वही जहाँ रोज घूमने जाता हूँ।
समयः 27-06-2012 की सुबह

30 comments:

  1. ये हैं दुनिया के ढंग !
    जितना सोचें ,आत्मा उतनी बेचैन .

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  2. वर्षा आये तो चैन मिले .

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  3. वाह ...
    अनूठी फोटोग्राफी ...

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  4. वर्षा की प्रतीक्षा और भय दोनों ही बहुत सुन्दर हैं, "इन्हें ना भय है न प्रतीक्षा" लाज़वाब...

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  5. अद्भुत और सटीक
    किसी को भय तो किसी को प्रतीक्षा
    शायद जीवन यही है

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  6. ये तो किसान और कुम्हार वाली बात हो गई . :)
    पहले कमेन्ट ऑप्शन काहे बंद किये थे .

    सुन्दर समीकरण .

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  7. बढ़िया जगह ढूँढी है आपने घूमने के लिए।

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  8. मनमोहक तस्वीरें..पर कुछ और होनी चाहिए थीं..

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  9. कहीं प्रतीक्षा कहीं डर..यही है जीवन..सुन्दर हैं फोटो

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  10. जीवन की तरहा वर्षा .. (प्राकृति) के भी कितने आयाम हैं ...

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

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  12. अब आप फोटोग्राफी में डॉ दराल,सुब्रमन्यन साहब को टक्कर दे रहे हैं -क्या खूब शीर्षक भी !

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  13. शुभानअल्लाह! कभी अपना ब्लॉग कभी आपका कमेंट देखते हैं। यहाँ, कुछ पल के लिए, तशरीफ..अरे नहीं, दिल रखने के लिए शुक्रिया।:)

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  14. वाह..खूबसूरत तस्वीरें! :)

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  15. वाह .. .बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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  16. सुन्दर तस्वीरें बोलती हुई वर्षा रानी जल्दी आओ

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  17. तस्वीरों के सहारे जीवन के महत्त्वपूर्ण तीन परस्थितियों को प्रदर्शित करने का आभार.... तस्वीरें और उनके कैपसन लाजवाब हैं

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  18. देवेन्द्र जी इस पोस्ट के प्रथम चित्र को मैं अपने भोजपुरी गीत के पोस्ट में आपकी बिना पूर्व अनुमति के साधिकार शामिल कर लिया है.
    http://ghazal-geet.blogspot.in/2012/06/blog-post_29.html

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  19. यही तो जीवन का यथार्थ है,किसी को किसी,किसी को किसी चीज की दरकार रहती है.

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  20. बहुत सुन्दर चित्र

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