25.11.12

पोखरा की यात्रा-2


पोखरा में मेरे बड़े भाई साहब रहते हैं, श्री प्रेम बल्लभ पाण्डेय जी। पोखरा जाना मेरे लिए घर जाने जैसा ही है। वे यहाँ पृथ्वी नारायण क्यांपस में भूगोल विषय के रीडर पद पर कार्यरत हैं। कभी ये पक्के बनारसी थे लेकिन अब पूरे पोखरावासी हो चुके हैं। लगभग 32 वर्षों से यहाँ अध्यापन कार्य कर रहे हैं। पोखरा इनको इतना सुंदर लगा कि एक बार यहाँ आये तो यहीं के होकर रह गये। ये हिंदी में थोड़ी बहुत ब्लॉगिंग भी करते हैं। लेकिन इनके ब्लॉग का नाम अंग्रेजी में है..हॉऊ टू युनाइट। ओशो के परम भक्त हैं। इनका दूसरा नाम 'स्वामी चेतन वर्तमान' है। इन्हीं की प्रेरणा से ओशो को थोड़ा बहुत पढ़ सका। कैंपस के ही आवास में रहते हैं। मैं जब यहाँ पहुँचा तो दोपहर के दो बज रहे थे। घर में भाभी श्री नहीं थीं। वे मेरे लिए चाय बनाने लगे और मैं आदतन उनकी फोटू खींचने लगा...


इन्होने कीचन भी अपने अंदाज में सजा रखा है। 

चाय पी कर थोड़ा कैंपस में ही घूमने लगा। यह बहुत शांत स्थान है। आवास की खिड़की खोलो तो सामने माछा पुछ्रे की हिम आच्छादित चोटी दिखलाई पड़ती है। पीछे सेती नदी बहती है। इस नदी के पानी में चूना बहुत ज्यादा है। इसलिए यहाँ लोग पानी उबालकर फिर फिल्टर से छानकर पीते हैं। 


पहाड़ों में हिमालय का दिखना किस्मत की बात होती है। कभी-कभी हफ्तों प्रतीक्षा करके भी लोग निराश लौट जाते हैं। यह मौसम अनुकूल है। इस समय वर्षात नहीं होती। बादल भी एकाध दिन के बाद छंट ही जाते हैं। सुबह हिमालय साफ दिखता है दिन चढ़ते-चढ़ते यह बादलों की ओट में छुप जाता है।

सूर्योदय के बाद क्वाटर से बाहर कैंपस में अन्नपूर्णा हिमालय कुछ ऐसा दिख रहा था।  

दूसरी सुबह वे बोले.."तुम मार्निंग वॉक करते हो मैं यहाँ से तीन किमी तेज चाल में पैदल चलकर, ओशो ध्यान केंद्र में जाकर डांस करता हूँ, ध्यान करता हूँ, प्रवचन सुनता हूँ। तुम भी चलो, आनंद आयेगा!" मैं झट से तैयार हो गया। हम दोनो तेज चाल से चलकर ओशो ध्यान केंद्र पहुँचे। मेरी समझ में आ चुका था कि मैदान में तीन किलो मीटर चलना और पहाड़ी चढ़ाई वाले रास्तों पर तीन किमी चलने में क्या फर्क होता है!  मैं थककर आराम करने लगा और वे मस्ती में डांस करने लगे। मैने सोचा इनकी एक तस्वीर हो जाय..जब तक ये डांस करते रहे मैं वहीं आसन पर बैठकर ध्यान कम आराम अधिक करता रहा। डांस करने के बाद ध्यान और ओशो का प्रवचन सुनते रहे। मुझे पहली बार एक अलग सा अनुभव हुआ। अच्छा लगा।  



उद्देश्य अभिव्यक्ति है। तस्वीरें अभिव्यक्ति का अच्छा माध्यम है। जब मेरे पास तस्वीरें हैं तो मैं शब्दों का अधिक इस्तेमाल क्यों करूँ ? आज की पोस्ट आदरणीय स्वामी 'चेतन वर्तमान' जी का परिचय कराने में ही हो गई लगती है । पोखरा की यात्रा का वर्णन बिना इनसे परिचय कराये अधूरा था। अब एक लाभ यह भी होगा कि जो कुछ मुझसे छूटेगा, चूक होगी, वे पढ़ेंगे तो अपने कमेंट से बताते/सुधारते भी रहेंगे। :)

जारी....  

19 comments:

  1. पहाड़ों में मौसम साफ़ मिलना एक फोटोग्राफर के लिए वरदान जैसा लगता है .
    ओशो भक्त बड़े भैया से मिलना अच्छा लगा .
    अब पोखरा के सुन्दर चित्र देखने का मन है.

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  2. आनन्दमयी हिमालय की गोद में आनन्द की बातें..

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  3. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 26-11-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  4. मनभावन परिदृश्य यह, कोई भी खो जाय ।

    ओशोवाणी टहलना, योग ध्यान मस्ताय ।

    योग ध्यान मस्ताय, बड़ी बढ़िया दिनचर्या ।

    आप रहे सुस्ताय, मस्त जीवन आचार्या ।

    सादर उन्हें प्रणाम, हिमालय पाप नशावन ।

    दर्शनीय सब चित्र, लगे रविकर मनभावन ।।

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  5. Hi Dear bro.,how r u ? There was no need to describe me.One point,i want to correct in your description,that no one drinks the water of Seti river,it`s too much loaded with lime and looks white in color.We drink underground water,and that too have much lime,so,after boiling and filtring we drink it to save our kidneys.
    Pokhara is the best place in the world.Here, there is not so warm in summer as on plains and not so cold as in Kathmandu.Fog is the rare phenomena here,and we enjoy plenty of sunlight during the winter.Rainy season is not so good for the visit.From the month of May to September,generally the sky remains cloudy and the Himalayan majestic mountains are hidden.Although it`s the Cherapunji of Nepal,experiencing the highest total in country,about 4000 mms.,but Cherapunji receavies 4 times than this amount of rain.
    It`s situated about 1000 meters above sea level only,but the Annapurna range,having 4 peaks above 8000 meters,is only abot 30 kms.from this place.So,the grand scenario of Himalaya enters into the hearts of peoples and creats deep pleasure.There are lakes,like,Fewa,Begnas,Rupa ,etc.to add the beauty of the place.It`s an international tourist site,and peoples,from all over the world come here to enjoy by the beauty.The well known trekking rout of Annapurna circuit is among the best trekking rout and may be started from this place.Here are many adventurous games,like paragling,rafting on swift flowing rivers,...etc.Many tourists from India also visit this place every year.
    Thanks for writing about this place on your blog.

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    1. वाह! मुझे उम्मीद थी की कुछ ऐसा ही कमेंट मिलेगा। पोस्ट को समृद्ध करने के लिए आभार।

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  6. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  7. परिचय अच्छा लगा, पोखरा भी।
    ऐसी खूबसूरत जगह नौकरी मिलना यानि सोने पर सुहागा।

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  8. देवेन्द्र भाई!
    हमारे लिए तो तीरथ हो गया.. भाई प्रेम बल्लभ (स्वामी चेतन) को हमारा प्रणाम कहें!!
    यह सचमुच स्वर्ग है धरती पर!!

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    1. सादर प्रणाम सलिलजी. आपको यहाँ देखकर बहुत अछ्छा लगा.

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  9. वाह आप तो बहुत बहुत दूर घुमा लाए

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  10. पोखरा देखने की इच्छा तो है देखते है कब मौका मिलता है?

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  11. सबसे बड़े भ्राता को प्रणाम..मैं भी यही सोच रहा था कि पानी क्या इतना करने के बात पीने योग्य हो जाता है..पर भ्राता जी की जानकारी के बाद उत्तर मिल गया है। बाकी पोखरा की तस्वीरें काफी कुछ कह रही हैं..।

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  12. वाह बहुत ही सुन्दर तस्वीरें है अपने आप अपनुई कहानी कहती हुई.....स्वामी चेतन जी से मिलकर बहुत अच्छा लगा.........ओशो जी का नव सन्यासी है ही सबसे अलग....आगे का इंतज़ार रहेगा।

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  13. ek baar ham hi hokar aaye pokhra se, bahut hi manoram place hai ...nice post

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  14. धन्यवाद स्वामि चेतन वर्तमान जी से परिचय करवाने के लिये.
    हिमालय के शिखर हों और ओशो की छांव.मैं भी ओशो की ऊंचाइयों की
    तलहटी पर बैठी हूं.

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  15. बहुत बढ़िया , बनारसी अग्रज ... कहे होते , हम भी साथ चले होते ..

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  16. बहुत खूब! चकाचक परिचय ! सुन्दर फ़ोटू!

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  17. वाह ... प्राकृति को भी कैमरे में कैद कर लिया आपने तो ...

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